डिंडोरी।
एक ओर सरकार आदिवासी अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर डिंडोरी जिले की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। करंजिया विकासखंड का बुंदेला उपस्वास्थ्य केंद्र मंगलवार को दोपहर साढ़े ग्यारह बजे तक बंद मिला। न ताला खुला था, न कोई स्टाफ मौजूद — यानी पूरा स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह ठप।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि कार्य समय में उपस्वास्थ्य केंद्र बंद रहने की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। जानकारी के अनुसार केंद्र के सीएचओ छुट्टी पर हैं, जबकि एएनएम क्षेत्र भ्रमण पर गई हैं। परिणामस्वरूप आदिवासी बहुल इस क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए 4 से 5 किलोमीटर दूर रूसा गांव जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी पियारी बाई ने आक्रोश जताते हुए कहा,
“यहां कई दिनों से कोई नहीं आता। केंद्र खुलता ही नहीं। मजबूरी में इलाज के लिए रूस जाना पड़ता है।”
ग्रामीणों का कहना है कि उपस्वास्थ्य केंद्र अक्सर बंद रहता है, जिससे गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, बच्चों के टीकाकरण और सामान्य बीमारियों का इलाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। सवाल यह है कि यदि उपस्वास्थ्य केंद्र ही बंद रहेंगे तो आदिवासी अंचल के लिए चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं का औचित्य क्या है?
यह मामला न सिर्फ स्वास्थ्य अमले की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक की प्रशासनिक निगरानी की विफलता भी दर्शाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे लापरवाही को खुला संरक्षण मिल रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? उपस्वास्थ्य केंद्र में नियमित, जवाबदेह और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं तुरंत बहाल की जाएं, ताकि आदिवासी परिवारों को इलाज के लिए दर-दर भटकना न पड़े।











