भारतीय किसान संघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल, शासन–प्रशासन के खिलाफ आर–पार की लड़ाई का ऐलान
डिण्डौरी। जिले के शहपुरा तहसील मुख्यालय में किसानों का आक्रोश अब आंदोलन का रूप ले चुका है। बिजली, पानी, सिंचाई, समर्थन मूल्य, अधोसंरचना और प्रशासनिक उपेक्षा जैसे मुद्दों को लेकर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। तहसील कार्यालय के समीप वीरांगना रानी दुर्गावती स्टेडियम में आयोजित इस धरना–प्रदर्शन में हजारों की संख्या में किसान, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और समयबद्ध कार्यवाही चाहिए, अन्यथा आंदोलन को जिले से आगे प्रांत स्तर तक ले जाया जाएगा।
132 केव्ही विद्युत स्टेशन की प्रमुख मांग
किसानों की सबसे प्रमुख मांग शहपुरा में 132 केव्ही का विद्युत उपकेंद्र (सब-स्टेशन) शीघ्र स्थापित करने की है। किसानों का कहना है कि वर्तमान में शहपुरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमराई हुई है। आए दिन लो-वोल्टेज, अघोषित कटौती और ट्रिपिंग की समस्या से किसान जूझ रहे हैं।
किसानों ने बताया कि—
सिंचाई पंप पर्याप्त वोल्टेज न मिलने के कारण नहीं चल पाते
रात–रात भर बिजली का इंतजार करना पड़ता है
मोटर जलने की घटनाएं बढ़ रही हैं
फसल की सिंचाई समय पर नहीं हो पा रही
किसानों का आरोप है कि बिजली की इस अव्यवस्था के कारण फसल लागत बढ़ रही है, जबकि उत्पादन घटता जा रहा है। कई किसानों ने मंच से बताया कि डीजल पंप का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट मांग की कि—
शहपुरा में 132 केव्ही विद्युत स्टेशन का निर्माण तत्काल स्वीकृत कर कार्य प्रारंभ किया जाए, ताकि किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को स्थायी समाधान मिल सके।
सिंचाई व्यवस्था की बदहाली: बांध हैं, पर पानी नहीं
धरना–प्रदर्शन में दूसरा बड़ा मुद्दा सिंचाई व्यवस्था की बदहाली का रहा। किसानों ने आरोप लगाया कि डिण्डौरी जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने बिलगांव मध्यम सिंचाई परियोजना बांध, दनदना जलाशय और चौरा जलाशय किसानों के लिए सिर्फ कागजों में ही सिंचाई साधन बनकर रह गए हैं।
किसानों का कहना है कि—
बांधों में पर्याप्त जल संग्रहण होने के बावजूद
नहरों की हालत इतनी खराब है कि खेतों तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा
कई स्थानों पर नहरें टूट चुकी हैं
कहीं गाद और झाड़ियों से नहरें पूरी तरह जाम हैं
धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने बताया कि हर साल मरम्मत के नाम पर लाखों–करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नहरों की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप, एफआईआर की मांग
किसानों ने सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। भारतीय किसान संघ का कहना है कि—
नहर मरम्मत के नाम पर राशि स्वीकृत होती है
कागजों में काम पूरा दिखा दिया जाता है
लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्य नजर नहीं आता
इसी को लेकर किसानों ने दो टूक मांग रखी कि—
बिलगांव मध्यम सिंचाई परियोजना, दनदना जलाशय और चौरा जलाशय की नहरों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और मरम्मत के नाम पर राशि डकारने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
किसानों का कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी यही खेल चलता रहेगा और किसान हमेशा ठगा जाता रहेगा।
फसलें बर्बादी की कगार पर
धरने में शामिल किसानों ने बताया कि सिंचाई के अभाव में इस समय जिले में धान, गेहूं, चना और सब्जी फसलों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। कई क्षेत्रों में किसान केवल बारिश के भरोसे खेती करने को मजबूर हैं।
किसानों के अनुसार—
समय पर पानी न मिलने से फसल सूख रही है
उत्पादन घट रहा है
लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है
किसानों ने कहा कि यदि जल्द ही सिंचाई और बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन–प्रशासन की होगी।
रेलवे लाइन और समर्थन मूल्य की भी मांग
धरना–प्रदर्शन के दौरान किसानों ने धान 3100 रुपये और गेहूं 2700 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के वादे को याद दिलाया। किसानों का आरोप है कि चुनावों के समय बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार उन्हें भूल गई।
इसके साथ ही किसानों ने शहपुरा सहित डिण्डौरी जिले को रेलवे लाइन से जोड़ने की पुरानी मांग को भी दोहराया।
किसानों का कहना है कि—
रेलवे सुविधा न होने से
कृषि उपज को बाहर भेजने में भारी खर्च उठाना पड़ता है
जिले का औद्योगिक और कृषि विकास अवरुद्ध है
विशाल रैली से प्रशासन को चेतावनी
धरना स्थल से किसानों ने नगर में विशाल रैली निकाली। हाथों में तख्तियां, बैनर और नारे लिखे पोस्टर लेकर किसान शासन–प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। रैली के माध्यम से किसानों ने यह संदेश दिया कि यह आंदोलन केवल शुरुआत है।
किसान नेताओं के बयान
बिहारी लाल साहू, जिला अध्यक्ष – भारतीय किसान संघ
उन्होंने कहा—
“हमने कई बार ज्ञापन दिए, अधिकारियों से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन आज तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई। किसान अब और इंतजार नहीं करेगा। शहपुरा में 132 केव्ही विद्युत स्टेशन और नहरों की मरम्मत हमारी प्राथमिक मांग है।”
निर्मल कुमार साहू, जिला मंत्री
उन्होंने कहा—
“यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक हमारी जायज मांगें पूरी नहीं हो जातीं। हमें केवल आश्वासन नहीं चाहिए, हमें लिखित आदेश और समयसीमा चाहिए।”
तुलाराम, महाकौशल प्रांत संगठन मंत्री
उन्होंने कहा—
“भारतीय किसान संघ लगातार किसानों के हक के लिए संघर्ष कर रही है। दुर्भाग्य की बात है कि यहां का प्रशासन किसानों से मिलने तक को तैयार नहीं है। यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो यह आंदोलन और व्यापक होगा।”
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
किसानों के इस व्यापक और संगठित आंदोलन से जिला प्रशासन पर दबाव साफ नजर आ रहा है। जिस तरह बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतरे हैं, उससे यह संकेत मिल रहा है कि यदि शासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन जिले की सीमाओं से बाहर जाकर प्रांतीय और राज्य स्तरीय आंदोलन का रूप ले सकता है।
डिण्डौरी जिले में किसानों का यह आंदोलन केवल बिजली और पानी की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि शासन–प्रशासन किसानों की मांगों को गंभीरता से लेकर 132 केव्ही विद्युत स्टेशन की स्थापना, नहरों की वास्तविक मरम्मत और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कब और कैसे करता है, या फिर किसान अपने आंदोलन को और उग्र रूप देने को मजबूर होंगे।












