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शहपुरा में झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाने में प्रशासन नाकाम, अवैध क्लिनिक बेखौफ संचालित

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शहपुरा – जिले के शहपुरा क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लिनिकों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, जबकि इन्हें रोकने के लिए किए जा रहे प्रशासनिक प्रयास कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। मेडिकल की आड़ में बिना किसी वैध डिग्री, डिप्लोमा और पंजीयन के इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टर न सिर्फ शहपुरा नगर बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी खुलेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। हालात यह हैं कि कार्रवाई के लिए गठित चार सदस्यीय ब्लॉक स्तरीय टीम की मौजूदगी के बावजूद अवैध क्लिनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे टीम और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार शहपुरा क्षेत्र में कई ऐसे क्लिनिक संचालित हो रहे हैं, जहां झोलाछाप डॉक्टर खुद को विशेषज्ञ बताकर गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। बिना जांच, बिना रिपोर्ट और बिना योग्यता इंजेक्शन, ड्रिप और भारी दवाइयां मरीजों को दी जा रही हैं। कई मामलों में गलत इलाज से मरीजों की हालत बिगड़ने की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सख्त कदम उठता नजर नहीं आ रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई की तैयारी की जाती है, उससे पहले ही संबंधित झोलाछाप डॉक्टरों को इसकी खबर लग जाती है। नतीजा यह होता है कि कार्रवाई के दिन क्लिनिकों पर ताले लटके मिलते हैं, लेकिन जैसे ही टीम लौटती है, वही क्लिनिक फिर से खुल जाते हैं। यह स्थिति साफ इशारा कर रही है कि कहीं न कहीं सूचना तंत्र में सेंधमारी है और अंदरूनी मिलीभगत से इन अवैध गतिविधियों को संरक्षण मिल रहा है।
झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने ब्लॉक स्तर पर चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। हालांकि टीम गठन के बाद भी न तो किसी बड़े क्लिनिक पर सीलिंग की कार्रवाई सामने आई है और न ही किसी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए गए हैं। इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि टीम केवल औपचारिकता निभा रही है या फिर दबाव में कार्रवाई से बच रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते शहपुरा क्षेत्र में अवैध क्लिनिक फल-फूल रहे हैं। रसूखदारों की छत्रछाया में झोलाछाप डॉक्टर निडर होकर अपना कारोबार चला रहे हैं, जबकि आम ग्रामीण मजबूरी में इन्हीं के पास इलाज कराने को मजबूर हैं। यही वजह है कि मामला सामने आने के बावजूद प्रशासन आंख मूंदे बैठा हुआ है। इससे साफ है कि कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है।
आमजन का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो किसी बड़ी और दुखद घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने मांग की है कि शहपुरा क्षेत्र में संचालित सभी निजी क्लिनिकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, बिना डिग्री इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों पर तत्काल कार्रवाई हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या फिर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रहेगी? जब तक इस सवाल का जवाब जमीन पर कार्रवाई के रूप में नहीं मिलता, तब तक शहपुरा की जनता यूं ही जोखिम भरे इलाज के भरोसे जीने को मजबूर रहेगी।

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