शहपुरा – शहपुरा नगर परिषद में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 7 में सांसद निधि से सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 11.50 लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार किया गया था। इस कार्य का ठेका 7 प्रतिशत कम दर पर ठेकेदार को स्वीकृत किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद उपयंत्री द्वारा माप पुस्तिका में दर्ज कर प्रथम देयक के रूप में करीब 4 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। निर्माण कार्य संसादनिधि से स्वीकृत था अतः भुगतान कार्यालय जिला योजना डिंडोरी से किया जाना था । लेकिन नगर परिषद का कारनामा एक और दूसरी माप पुस्तिका तैयार करते हुए ठेकेदार को लगभग 10 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान जिला योजना कार्यालय से करवा दिया गया।नगर परिषद से किये भुगतान को आपस में बंदर बंट कर लिया गया है। इस प्रकार ठेकेदार को कुल 14 लाख रुपए के आसपास राशि का भुगतान हुआ, जबकि वास्तविक देय राशि महज़ 6 लाख रुपए शेष थी। पूरे प्रकरण की जांच के बाद और भी गंभीर खुलासे होंगे।
नगर परिषद कार्यालय से प्राप्त सूत्रों से यह जानकारी निकल कर आ रही है कि भुगतान संबंधित दस्तावेजों को कार्यालय से गोल कर दिया गया है।
आवेदक हिमांशु अग्रवाल का कहना है कि इस वित्तीय अनियमितता में नगर परिषद अध्यक्ष, उपयंत्री एवं पार्षदों की मिलीभगत साफ दिखाई देती है। आरोप है कि परिषद में इस तरह के कई आर्थिक घोटाले लगातार हो रहे हैं, जो जांच का गंभीर विषय है।
नगरवासियों द्वारा इस मामले की शिकायत कलेक्टर के नाम एसडीएम शहपुरा को की गई है और विस्तृत स्तर पर जांच की मांग की गई है। ज्ञापन की प्रतिलिपि संभागायुक्त जबलपुर, आयुक्त नगरीय प्रशासन भोपाल एवं एसडीएम शहपुरा को भी सौंपी गई है।
जनता ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि शासकीय राशि के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया जा सके।
