डिंडौरी । जबलपुर–अमरकंटक नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का मामला सामने आया है। कुण्डम से शहपुरा तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान शहपुरा बाईपास में शारदा टेकरी के पास बन रहे पुल में तय तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया मे जमकर वायरल हो रहा है।


स्थानीय लोगों के अनुसार पुल निर्माण का काम पेटी ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है और निर्माण प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि पुल के नीचे पाइप डालने से पहले मजबूत बेस तैयार नहीं किया गया और न ही पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) की ढलाई की गई। इसके बावजूद सीधे पाइप डालकर निर्माण को आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्या कहते हैं तकनीकी मानक
सड़क एवं पुल निर्माण से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार किसी भी पुल या कलवर्ट निर्माण में सबसे पहले जमीन को समतल कर मजबूत बेस तैयार किया जाता है। इसके बाद पीसीसी की परत डाली जाती है ताकि संरचना को मजबूती मिल सके। लेकिन यदि इन चरणों को छोड़कर सीधे पाइप डाल दिए जाएं तो पूरी संरचना कमजोर हो सकती है।
बरसात में बढ़ सकता है खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का निर्माण कार्य भविष्य में बड़ा खतरा बन सकता है। बरसात के दौरान तेज पानी के बहाव में यदि पुल की नींव मजबूत नहीं होगी तो उसके धंसने या बहने की आशंका बनी रहेगी। यह मार्ग क्षेत्र का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
इतने बड़े हाईवे प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य की निगरानी के लिए इंजीनियर और विभागीय अधिकारी नियुक्त होते हैं। इसके बावजूद यदि निर्माण में इस तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है।
ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग
मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी।











