डिंडौरी। आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी के पांच गोदामों में लापरवाही से सड़ रहे 68 सौ मैट्रिक टन चावल का मामला एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इस गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए खराब हुए चावल की राशि जिम्मेदारों से वसूली के साथ डीसीसी करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। डिंडौरी कलेक्टर ने चावल सड़ने के मामले में भारत राइस मिल, बजरंग राइस मिल गीधा, वाहेगुरू राइस मिल मानिकपुर, मां नर्मदा राइस मिल कोहका और खनूजा राइस मिल मडियारास संचालकों को नोटिस जारी कर खराब चावल बदलने के निर्देश दिए गए थे। सभी ने नोटिस के अलग-अलग जवाब दिए हैं।
मिलिंग नीति 2023-24 में खराब हुए चावल का चार गुना पेनाल्टी का भी पत्र में उल्लेख किया गया है। प्रकासित खबरो के आधार पर भोपाल से आई जांच टीम को भी गरीबों के निवाले में बिलबिलाते कीड़े मिले थे।
कलेक्टर द्वारा इस मामले में सभी मिलरों को नोटिस जारी कर चावल बदलने के निर्देश दिए गए थे। बताया गया कि इस मामले में दो मिलर जहां चावल बदलने के लिए उठाव करने की सहमति देने की बात कह रहे हैं, वहीं तीन मिलर अलग अलग कारणों का उल्लेख कर खराब हुए चावल की जिम्मेदारी गोदाम प्रभारियों पर ही डाल रहे हैं।

गोदाम प्रभारियों पर लापरवाही का आरोप
खराब हुए चावल के बारे में मिलर और गोदाम प्रभारी आमने-सामने हैं। निर्देश के तहत सडे चावल को न बदलने वाले मिलरों पर कार्रवाई के लिए भेजे गए प्रतिवेदन के बाद सरगर्मी बढ गई है। मिलरों का आरोप है कि चावल गोदाम प्रभारियों की लापरवाही से सड़ा है, जबकि भोपाल स्तर की जांच में मिलरों की जिम्मेदारी बताई गई थी।

27 करोड से अधिक के खराब हुए चावल का मामला चर्चाओं में आने से आरोप प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। डीसीसी के तहत खराब हुए चावल की नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। जिला स्तर पर एक टीम अब खराब चावल के बारे में निर्णय लेगी। करोडों की चार गुना पेनाल्टी के साथ वसूली का पत्राचार शुरू होने से हडकंप की स्थिति देखी जा रही है।

पांच मिलरों को कलेक्टर ने जारी किया था नोटिस
कलेक्टर ने चावल सड़ने के मामले में भारत राइस मिल, बजरंग राइस मिल गीधा, वाहेगुरू राइस मिल मानिकपुर, मां नर्मदा राइस मिल कोहका और खनूजा राइस मिल मडियारास संचालकों को नोटिस जारी कर खराब चावल बदलने के निर्देश दिए गए थे। सभी ने नोटिस के अलग-अलग जवाब दिए हैं।
भारत राइस मिल संचालक द्वारा जवाब में यह उल्लेख किया गया कि उनका चावल त्रिस्तरीय गुणवत्ता में पास होकर गोदाम में जमा किया गया था। प्रार्थी का चावल ऑनलाइन दर्ज हुआ था। संबंधित ने आगे मिलिंग की और भुगतान भी मिल गया। एक वर्ष बाद खराब चावल के उठाव के लिए जो कहा जा रहा है वह न्याय संगत नहीं है।
इससे संबंधित को अपूर्णीय क्षति होगी। इसी तरह बजरंग राइस मिल संचालक द्वारा अपने जवाब में उल्लेख किया गया कि गोदाम संचालकों द्वारा रखरखाव में लापरवाही बरती गई इसलिए चावल खराब हुआ। रखरखाव की जिम्मेदारी गोदाम संचालकों की ही थी।
चावल बन चुका है पावडर
इसी तरह खनूजा राइस मिल मडियारास द्वारा अपने जवाब में यह उल्लेख किया गया था कि चावल की देखरेख न होने के कारण उनके द्वारा जमा चावल में कीडे लग चुके हैं और चावल नहीं निकल रहा है। यह चावल पूरा पावडर हो चुका है। चावल खराब होने का कारण एमपीडब्ल्यूएलसी बताया गया। संबंधित द्वारा जवाब में यह उल्लेख किया गया कि मिलर पर पूरी जिम्मेदारी देना न्याय संगत नहीं होगा।
संबंधित द्वारा चावल बदलने में 12 प्रतिशत छूट की मांग की गई थी। मां नर्मदा राइस मिल संचालक कोहका द्वारा नोटिस के जवाब में यह उल्लेख किया गया था कि अमानक चावल का उठाव किया जा रहा है। उठाव के बाद चावल जमा किया जाएगा। इसी तरह वाहेगुरू राइस मिल संचालक द्वारा भी 580 बोरी चावल का उठाव करना बताया गया। संबंधित ने बताया कि शेष चावल उनकी मिल का नहीं है।
गोदामों में खराब हो रहे चावल को लेकर सभी मिलरों को मैंने नोटिस दिया था। दो मिलर तो चावल बदल रहे हैं, लेकिन तीन मिलर चावल न बदलते हुए अलग-अलग कारण बता रहे हैं। इस मामले में मैंने महाप्रबंधक सिविल सप्लाईज कॉर्पाेरेशन भोपाल को संबंधितों से खराब हुए चावल की वसूली के लिए पत्र लिख दिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 की मिलिंग नीति में दिए गए प्रावधानों के अनुसार संबंधितों पर दांडिक प्रावधान व वसूली की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा गया है।- अंजू पवन भदौरिया, कलेक्टर डिंडौरी











