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चैत्र प्रतिपदा पर जनजातीय छात्रावास के छात्रों ने निभाई सांस्कृतिक परंपरा, राहगीरों का तिलक कर दी नववर्ष की शुभकामनाएँ

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डिंडोरी। भारतीय नववर्ष के पावन अवसर चैत्र प्रतिपदा पर जनजातीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और परंपरा का अद्भुत दृश्य जिला डिंडोरी के बरगांव क्षेत्र में देखने को मिला। वीर नारायण बालक छात्रावास, जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल, बरगांव के छात्रों ने जबलपुर–डिंडोरी मार्ग पर राहगीरों को तिलक लगाकर भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएँ दीं।

प्रातःकाल से ही छात्र पारंपरिक वेशभूषा में सजकर सड़क किनारे एकत्रित हुए और प्रत्येक राहगीर का स्वागत चंदन और कुमकुम के तिलक से किया। इस अवसर पर “नव संवत्सर की शुभकामनाएँ”, “संस्कृति का सम्मान – राष्ट्र का अभिमान” जैसे उद्घोष वातावरण में गूंजते रहे। राहगीरों ने भी इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए छात्रों को आशीर्वाद दिया।

छात्रों ने बताया कि चैत्र प्रतिपदा केवल नववर्ष का आरंभ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रतीक है। इस दिन से ही ऋतु परिवर्तन के साथ नवजीवन का संचार होता है, जो हमारे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।

छात्रावास के अधीक्षक एवं जनजाति कल्याण केंद्र के पदाधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना तथा समाज में भारतीय नववर्ष के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक परिवेश में अपनी परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने छात्रों के इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह पहल समाज में सांस्कृतिक जागरण का सशक्त माध्यम बन सकती है।

इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जनजातीय समाज न केवल अपनी परंपराओं के प्रति सजग है, बल्कि उन्हें समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भारतीय नववर्ष के इस स्वागत ने पूरे क्षेत्र में उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण निर्मित कर दिया।

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