शहपुरा नगर परिषद के सभी 15 वार्डों में इन दिनों आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, ये कुत्ते राहगीरों, स्कूली बच्चों तथा दोपहिया वाहन चालकों पर अचानक हमला कर देते हैं, जिससे कई लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों के पीछे दौड़ने और काटने की घटनाओं से अभिभावकों में भय का वातावरण है।
वार्ड क्रमांक 1 के एक निवासी द्वारा नगर परिषद में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी, किन्तु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद संबंधित वार्ड के एक नागरिक द्वारा सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन वहां भी अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इससे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
राज्य स्तर पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा आवारा पशुओं एवं कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश (SOP) जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने तथा नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान है। साथ ही, ऐसी घटनाओं की रोकथाम हेतु स्थानीय प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद शहपुरा में न तो कुत्तों को पकड़ने की कोई नियमित व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही उनके पुनर्वास या नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना लागू की गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए तथा उन्हें आबादी और सार्वजनिक स्थलों से दूर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।












