जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल को मिला राष्ट्रीय सम्मान,11वें संत ईश्वर सम्मान समारोह में उपराष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन ने प्रदान किया सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र

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डिंडोरी।

, 4 अक्टूबर 2026। जनजातीय समाज के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, सामाजिक जागरूकता एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर सेवा कार्य कर रहे जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल के सेवा प्रकल्प को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। नई दिल्ली में आयोजित 11वें संत ईश्वर सम्मान 2026 समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल के सेवा प्रकल्प को सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। समिति की ओर से अध्यक्ष श्री एम. एल. साहू एवं श्री ज्ञानेंद्र सिंह ने सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र प्राप्त किया।

संत ईश्वर सम्मान समाजसेवा, मानवीय संवेदना और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के योगदान को सम्मानित करने की पहल है। लगातार 11 वर्षों से आयोजित हो रहे इस सम्मान समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्य करने वाले समाजसेवियों और सेवा संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने सेवा को भारतीय जीवन-दृष्टि की महत्वपूर्ण परंपरा बताते हुए समाजसेवी संस्थाओं के जमीनी योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल आर्थिक विकास और आधारभूत संरचना से नहीं, बल्कि करुणा, चरित्र, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान एवं अवसर उपलब्ध कराने से भी होता है।

जनजातीय क्षेत्रों में निरंतर सेवा कार्य

जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल द्वारा दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भरता के माध्यम से जनजातीय समाज के बच्चों, युवाओं और परिवारों को सशक्त बनाने की दिशा में संस्था द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।

विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में, जहाँ मूलभूत सुविधाओं और विकास के अवसरों की आवश्यकता अधिक है, सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के बीच पहुंचकर कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और अवसर-संपन्न बनाना है।

सेवा साधकों के समर्पण का सम्मान

जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल के अध्यक्ष एम एल साहू ने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी सेवा साधकों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के समर्पण का सम्मान है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में समाज के बीच रहकर निरंतर सेवा कार्य कर रहे हैं।ज्ञानेद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान सेवा कार्यों को और अधिक गति देने की प्रेरणा है। इससे जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और आत्मनिर्भरता से जुड़े सेवा प्रकल्पों को और व्यापक बनाने का संकल्प मजबूत होगा।

‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की भारतीय परंपरा

संत ईश्वर सम्मान समारोह का मूल भाव भारतीय सेवा परंपरा से जुड़ा है “नर सेवा ही नारायण सेवा।” इसी भावना के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर सेवा करना राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान इस बात को रेखांकित करता है कि जब सेवा कार्य समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ते हैं और निःस्वार्थ भाव से निरंतर किए जाते हैं, तो उनका प्रभाव स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त करता है।

चंद्रशेखर पटेल

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