शहपुरा । आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। निजी अस्पतालों के दलालों द्वारा भोले-भाले ग्रामीणों को मुफ्त इलाज का लालच देकर उनके आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग किए जाने का मामला उजागर हुआ है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निर्देश पर शहपुरा एसडीएम फरहान जामदार ने कार्रवाई करते हुए पिपरिया माल के ग्रामीणों से भरी एक बस को शहपुरा में पकड़ा।
जानकारी के अनुसार, जिले में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि जबलपुर और शहडोल में संचालित कुछ निजी अस्पतालों के दलाल आदिवासी बाहुल्य गांवों में सक्रिय हैं। ये दलाल ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर इलाज के नाम पर शहर ले जाते हैं और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से राशि निकालने का खेल करते हैं।
बस में सवार ग्रामीणों में कोई बीमार नहीं मिला
शनिवार सुबह एसडीएम शहपुरा फरहान जामदार ने जांच के दौरान ग्रामीणों से भरी बस को रोका। पूछताछ में सामने आया कि बस में सवार लोगों के पास आयुष्मान कार्ड थे, लेकिन प्रारंभिक जांच में कोई भी व्यक्ति बीमार नहीं पाया गया। ग्रामीणों को सुखसागर अस्पताल जबलपुर ले जाने की बात सामने आई। एसडीएम ने इसे फर्जी इलाज के नाम पर आयुष्मान योजना की राशि निकालने का संदिग्ध मामला बताया।
सुखसागर अस्पताल के जिम्मेदारों को तलब किया
मामले में सुखसागर अस्पताल के जिम्मेदारों को भी तलब किया जा रहा है। जिन मरीजों को इलाज के लिए ले जाने की बात कही गई थी, उनकी जिला अस्पताल के डॉक्टरों से जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक तौर पर किसी मरीज में बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं।
आदिवासी परिवारों को बनाया जा रहा निशाना
बताया जा रहा है कि बजाग, करंजिया और शहपुरा क्षेत्र के आदिवासी परिवारों को दलालों द्वारा चिन्हित किया जाता है। उन्हें मुफ्त इलाज का लालच देकर जबलपुर ले जाया जाता है। वहां एक-दो दिन भर्ती दिखाकर आयुष्मान कार्ड से उपचार की राशि निकालने का आरोप है। इससे वास्तविक जरूरतमंद मरीजों के कार्ड की निर्धारित लिमिट भी समाप्त हो सकती है।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्रवाई
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को इस संबंध में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए गए थे। इसी के बाद शनिवार को शहपुरा में यह कार्रवाई की गई। अब मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, जिससे आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
ग्रामीणों के स्वास्थ्य और शासन की जनकल्याणकारी योजना की राशि के दुरुपयोग को लेकर प्रशासन की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











